बच्चे के रोने को अनदेखा करना उसके मस्तिष्क को हानि पहुंचाता है।

अक्सर बार-बार रोते बच्चे की वजह से परेशान माँ को देख हम कुछ देर के लिए रोने को अनदेखा करने की सलाह दे देते हैं। पर क्या आपने सोचा कि बच्चे के दिमाग पर क्या चल रहा है?

Amit Bajaj नवम्बर 28, 2017 at 3:15

बिलकुल छोटे बच्चे बड़ों की तरह शब्दों के माध्यम से अपनी बात बयान नहीं कर पाते, क्योंकि उनका मस्तिष्क अभी विकसित हो रहा है। ऐसे में अपनी बात जाहिर करने का उनके पास एक ही माध्यम होता है – उनका रोना।

बच्चा रोते हुए माँ को पुकार रहा है

बच्चे को रोता सुन माँ तुरंत विचलित हो जाती है, और अगर थोड़ी सी भी बच्चे से दूर है, तो तुरंत बच्चे के पास पहुंचना चाहती है। ऐसे मौकों में आपने अक्सर सहेलियों से या घर के किसी सदस्य को ही परेशान माँ को यह सलाह देते हुए सुना होगा, “चिंता मत करो, थोड़ी देर बच्चा रो भी रहा है, तो कोई बात नहीं”।

लेकिन मातृत्व एक्सपर्ट पेनेलोप लीच ने अपनी नयी पुस्तक में यह साफ़ लिखा है कि बच्चे को बार-बार इस तरह से रोते-बिलखते छोड़ देना उसके विकसित हो रहे मस्तिष्क को क्षति पहुंचाता है। हाल ही में मस्तिष्क-वैज्ञानिकों द्वारा किये गए एक शोध में भी यही सामने आया है कि लम्बे समय तक रोना शिशु के स्ट्रेस लेवल को अत्यधिक बढ़ा देता है। इस दौरान कोर्टिसोल नामक एक स्ट्रेस हॉर्मोन की मात्रा बहुत बढ़ जाती है, और यह दिमाग के लिए विषैला होता है।

इंग्लैंड के गार्डियन अखबार के एक रिपोर्टर से बात करते हुए लीच कहती हैं, “एक बच्चे का रोना स्वाभाविक है, सिर्फ उसका रोना मात्र कोई परेशानी नहीं। कुछ बच्चे ज्यादा रोते हैं, तो कुछ कम। एक शिशु के पहले एक वर्ष में उसके पास ध्यान खींचने का एक ही तरीका होता है। और अगर उसके इस तरीके से उसको बार-बार सफलता नहीं मिलती, तो इससे उसके भावनात्मक विकास पर अत्यधिक असर पड़ता है।”

एक बच्चा जिसके रोने पर कोई उसकी तरफ नहीं आता, वो धीरे-धीरे बगैर रोये या बहुत कम रोकर ही सोना शुरू कर देता है। उसके अविकसित मस्तिष्क को यह सन्देश मिलता है कि कोई उसकी चिंता नहीं करता। और नन्हे दिमाग पर यह सन्देश जो अमिट छाप छोड़ता है, उसका नतीजा उसे ज़िन्दगी भर भुगतना पड़ता है!

वहीँ इसके उल्टे, जब एक बच्चे को रोता सुन, उसकी माँ या पापा उसके पास आकर प्यार से उसे अपनी गोद में उठा लेते हैं, तो बच्चे को इस ममत्व का एहसास होता है, और उसके मस्तिष्क को एक सकारात्मक सन्देश मिलता है: “मुझे प्यार करने वाले लोग हैं, और जब मुझे कोई तकलीफ होगी, तो कोई है जो मेरा ख़याल रखेगा”। यह सन्देश उसके मस्तिष्क के विकास में सहायक होता है।

एक माँ अपने शिशु के साथ

तो अगली बार, जब आप अपने बच्चे को रोता सुने, तो उसे ज्यादा दूर अपनी ममता से वंचित मत रखिये। आपका प्यार का एक एहसास उसे जीवन भर याद रहेगा!

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