हिन्दू धर्म में अनेक व्रत और त्यौहारों मनाने की मान्यता है। हर व्रत या त्यौहार से कोई न कोई कथा अवश्य ही जुड़ी होती है जो उस व्रत या त्यौहार का महत्व बताती है। एकादशी व्रत को सभी व्रतों का राजा कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। हर माह में एकादशी दो बार होती है, इस तरह एक साल में कुल 24 एकादशी व्रत होते हैं, और अगर किसी वर्ष अधिक मास हो तो यह संख्या 26 हो जाती है। हर एकादशी व्रत का अपना अलग महत्व होता है और फायदे होते हैं।
तो आइए देखते है कि इस वर्ष एकादशी व्रत कब-कब होगा।
सफला एकादशी का व्रत करने से उत्तम फल मिलता है। मन की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।
पुत्रदा एकादशी संतान की प्राप्ति और उसकी लंबी आयु के लिए की जाती है।
षटतिला एकादशी करने से मनुष्य को अपनी सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि जितना पुण्य किसी कन्या के कन्यादान करके मिलता है उतना ही पुण्य इस एकादशी व्रत को रख कर मिलता है।
जया एकादशी व्रत करने से मनुष्य अगले जन्म में निम्न योनि में जाने से बच जाता है।
जो इस एकादशी व्रत को करता है उसे जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है। माना जाता है कि श्री राम ने लंका पर आक्रमण से पहले इस व्रत को किया था और रावण पर विजय प्राप्त की थी।
आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि आंवले के वृक्ष के स्मरण से ही गोदान करने जितना पुण्य प्राप्त होता है।
पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से जीवन के सभी कष्टों और पापों से मुक्ति मिल जाती है।
जो व्यक्ति कामदा एकादशी का व्रत रखता है उसे राक्षस योनि से मुक्ति मिल जाती है।
जो पुण्य 10 हजार वर्षों की तपस्या करने के बाद प्राप्त होता है वही पुण्य वरुथिनी एकादशी को करने से मिल जाता है।
मोहिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य मोह जाल से छुटकारा पा सकता है।
माना जाता है कि अपरा एकादशी करने से अपार खुशियाँ मिलती हैं।
इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत किया जाता है। और इस एक एकादशी को कर लेने से 24 एकादशी के व्रत का फल मिलता है।
योगिनी एकादशी व्रत करने का फल 88 हजार पंडितों को भोजन कराने के फल के समान होता है।
देवशयनी एकादशी व्रत करने से जाने अनजान में किए गई पापों से मुक्ति मिलती है।
कामिका एकादशी से मनुष्य को कुयोनि में प्रवेश से मुक्ति मिलती है।
पुत्रदा एकादशी करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
अजा एकादशी व्रत करने से दरिद्रता दूर होती है।
पार्स्व/परिवर्तिनी एकादशी को करने से भगवान विष्णु तो प्रसन्न होते ही हैं लेकिन इससे माँ लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है।
इन्दिरा एकादशी व्रत करने का पुण्य आपके पितरों को मिलता है।
जैसे कि इसका नाम है पापांकुशा एकादशी, इस व्रत को करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
रमा एकादशी का व्रत करने से जीवन के सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है।
देव उठनी व्रत करने से भाग्य उदय हो जाता है।
उत्पन्ना एकादशी व्रत करने से सभी तीर्थ के दर्शन करने के समान फल मिलता है।
मोक्षदा एकदाशी का व्रत पूर्ण भावना से रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सफला एकादशी का व्रत करने से उत्तम फल मिलता है। मन की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।
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